राजनांदगांव। केंद्र के गृह मंत्रालय के अधीन गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस (HLCDC) द्वारा राज्यों से पिछले 15 वर्षों का धर्मवार और जिलावार आंकड़ा मांगे जाने पर कांग्रेस नेता आफताब आलम ने सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव आलम ने कहा कि इस प्रक्रिया के उद्देश्य, पारदर्शिता और संवैधानिक आधार को लेकर केंद्र सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आलम ने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार समिति ने राज्यों से जन्म पंजीकरण, वाहन पंजीकरण, स्कूलों में नामांकन, संपत्ति लेन-देन, मतदाता पंजीकरण तथा आधार और राशन कार्ड पंजीकरण में असामान्य वृद्धि से संबंधित जानकारी मांगी है। धार्मिक स्थलों की जिलावार जानकारी और कुछ क्षेत्रों में धार्मिक संरचना में बदलाव से संबंधित जानकारी भी प्रश्नावली में शामिल होने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि कई सरकारी विभाग धर्म के आधार पर इस तरह के आंकड़े नियमित रूप से संधारित नहीं करते हैं। ऐसे में 15 वर्षों का धर्मवार आंकड़ा किस आधार पर तैयार किया जाएगा और इसका उपयोग किस उद्देश्य से होगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार राज्यों के अधिकारियों ने भी उपलब्ध रिकॉर्ड के प्रारूप को लेकर कठिनाई जताई है।
आलम ने केंद्र सरकार से समिति की 35 बिंदुओं वाली प्रश्नावली और उसके उद्देश्य को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने धर्मवार आंकड़े जुटाने के कानूनी आधार को स्पष्ट करने, नागरिकों की गोपनीयता एवं समानता के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी समुदाय के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले सत्यापित आंकड़ों के इस्तेमाल की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि समिति की अंतिम रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
आलम ने कहा कि जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन वैज्ञानिक और सत्यापित आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए। उनके अनुसार अधूरे आंकड़ों या अनुमानों के आधार पर किसी समुदाय के संबंध में निष्कर्ष निकालने से सामाजिक विश्वास प्रभावित हो सकता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में HLCDC का गठन किया है। सरकारी जानकारी के अनुसार समिति का उद्देश्य अवैध आव्रजन और अन्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपाय सुझाना है।



