रायपुर। समाजसेवा का असली अर्थ वातानुकूलित (एसी) कमरों में बैठकर योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर लोगों के बीच काम करने में है। इस बात को अल्वा फाउंडेशन (पंजीकृत संस्था, नई दिल्ली) के चेयरमैन डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने अपनी सादगी की मिसाल पेश करते हुए शहर के कुशालपुर इलाके में पेड़ की छांव तले, जमीन पर बैठकर अपना दफ्तरी कामकाज निपटाया।
जानकारी के अनुसार, कुशालपुर में देवांगन पान ठेला के पीछे स्थित एक खुले स्थान को डॉ. साहू ने अपना कार्यालय बनाया। यहां उन्होंने जमीन पर बाकायदा चटाई बिछाई और बैठकर संगठन के कार्यों की समीक्षा की। एक ओर जहां उन्होंने संस्था के रजिस्टर में आगामी कार्ययोजनाओं को कलमबद्ध किया, वहीं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए टैबलेट पर संगठन की गतिविधियों का डिजिटल जायजा भी लिया। उनका यह सहज और जमीनी अंदाज वहां मौजूद लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र रहा।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही हमारा लक्ष्य
इस मौके पर डॉ. साहू ने अपने कार्य करने के तरीके को लेकर कहा, “अल्वा फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचना है। जब तक हम स्वयं जमीन पर नहीं बैठेंगे, तब तक जमीन की वास्तविक हकीकत और आम जनमानस की जरूरतों को कैसे समझेंगे।”
कार्यकर्ताओं में भरता है नया जोश
संस्था के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बताया कि चेयरमैन डॉ. साहू का यह कोई पहला वाकया नहीं है, वे अक्सर इसी तरह जमीनी स्तर पर जाकर आम लोगों के बीच काम करना पसंद करते हैं। इतने बड़े पद पर होने के बावजूद उनकी यह सादगी और कार्यशैली संगठन के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है। इस अवसर पर संगठन के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



