Home छत्तीसगढ़ अंधविश्वास के पर्दाफाश पर कोलिहा के विद्यार्थियों का नाटक रहा आकर्षण का...

अंधविश्वास के पर्दाफाश पर कोलिहा के विद्यार्थियों का नाटक रहा आकर्षण का केंद्र

4
0

कोलिहा। राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जन-जागरूकता शैक्षिक संगोष्ठी–2026 (डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव) में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोलिहा (विकासखंड सिमगा, जिला बलौदाबाजार) के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। विद्यालय के बच्चों ने “अंधविश्वास का पर्दाफाश” विषय पर एक प्रभावशाली एवं संदेशपरक नाटक की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और समाज में वैज्ञानिक सोच अपनाने का मजबूत संदेश दिया।

अभिनय और वैज्ञानिक प्रयोगों का अनोखा संगम
मार्गदर्शिका शिक्षिका श्रीमती चित्रा साहू के निर्देशन में विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, भ्रांतियों और तथाकथित चमत्कारों की असलियत उजागर की। बच्चों ने पहले अभिनय के ज़रिए अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं को दर्शाया, फिर व्यावहारिक वैज्ञानिक प्रयोगों व तर्कों के आधार पर उनका पर्दाफाश किया। नाटक का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था कि किसी भी घटना को बिना जांच-पड़ताल और प्रमाण के स्वीकार न करें।

“अंधविश्वास नहीं, विज्ञान सही है”
प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि चमत्कार समझे जाने वाले कई कारनामों के पीछे सरल वैज्ञानिक कारण होते हैं। नाटक ने दर्शकों को प्रश्न पूछने, प्रमाण तलाशने और हर दावे को वैज्ञानिक कसौटी पर परखने के लिए प्रेरित किया। मंच से गूंजता संदेश—“अंधविश्वास नहीं, विज्ञान सही है” और “चमत्कार पर नहीं, प्रमाण पर विश्वास करें—अंधविश्वास छोड़ें, विज्ञान की ओर बढ़ें” दर्शकों के दिलों को छू गया।

स्मृति-चिह्न देकर किया गया सम्मानित
संगोष्ठी में विद्यार्थियों की इस सक्रिय सहभागिता और जीवंत प्रस्तुति की जमकर सराहना की गई। कार्यक्रम के अंत में बाल कलाकारों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

शिक्षकों व स्टाफ के सामूहिक प्रयास की सराहना
इस उपलब्धि पर श्रीमती चित्रा साहू ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना आज के समय की बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जब बच्चे हर बात के पीछे का कारण और प्रमाण जानने की आदत डालेंगे, तभी समाज से अंधविश्वास मिटेगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय विद्यालय के प्रधान पाठक श्री सुरेश डांडेकर, सहयोगी शिक्षक श्री नंदकुमार ध्रुव, श्री योगेश कुमार ध्रुव तथा समस्त स्टाफ के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया। विद्यालय परिवार ने बच्चों की इस पहल को उनकी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।