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लोन के नाम पर संगठित ठगी का सनसनीखेज खुलासा : रसूखदारों की शह में चल रहा खुला खेल, आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग

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राजनांदगांव। शहर में कम ब्याज पर लोन दिलाने के नाम पर चल रहे एक कथित संगठित ठगी गिरोह का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पीड़ित द्वारा जिला प्रशासन और पुलिस को दिए गए विस्तृत आवेदन में आरोप है कि, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से झांसा देकर उसके नाम पर फाइनेंस कराकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीद लिए और बाद में किस्तों का भुगतान करने से मुकर गए। पीड़ित का कहना है कि, शुरुआत में आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए आसान प्रक्रिया का हवाला दिया, सिर्फ आधार, पैन और मोबाइल नंबर के जरिए लोन स्वीकृत कराने का दावा किया गया। इसके बाद उसके नाम पर फाइनेंस कंपनियों से महंगे मोबाईल सहित अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान खरीदे गए। कुछ ही समय बाद जब फाइनेंस कंपनियों की ओर से किस्तों के भुगतान के लिए कॉल आने लगे, और वसूली के लिए घर तक पहुंचने लगे, तब इस सुनियोजित ठगी का पर्दाफाश हुआ।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि, एक आरोपी का पिता शहर का प्रभावशाली वकील है, जो अपने पद और कानून की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है। पीड़ित के अनुसार, इसी संरक्षण के चलते आरोपी खुलेआम समझौते का दबाव बना रहे हैं और कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं।

पीड़ित ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से की है। इस पूरे मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक न्यासभंग), 467/468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) तथा 34 (साझा आपराधिक मंशा) के तहत प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं को भी जोड़ने शिकायत पत्र में आग्रह किया गया है। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है। इस पर लोगों का कहना है कि, यदि प्रभाव और रसूख के चलते ऐसे मामलों में ढिलाई बरती गई, तो यह आम जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ होगा। पुलिस की प्रारंभिक प्रतिक्रिया पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, शिकायत प्राप्त हो चुकी है और सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। दस्तावेजों, कॉल डिटेल्स और फाइनेंस रिकॉर्ड के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

गौरतलब हो कि, यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी का नहीं, बल्कि कानून के दुरुपयोग और प्रभाव के जरिए न्याय को प्रभावित करने की कोशिश का प्रतीक बनता जा रहा है।

कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि, इस एक मामले के सामने आ जाने के बाद उक्त आरोपियों के विरुद्ध और भी ऐसे मामलों के खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि, पीड़ित को न्याय और दोषियों को सजा दिलाने प्रशासन इस चुनौतीपूर्ण मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है। उक्त मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश साहू एवं पूर्व प्रदेश सचिव, जिला प्रभारी एवं जिला उपाध्यक्ष श्री इमानवेल सिंह को भी प्रतिलिपि के माध्यम से दी गई है।