रायपुर। रायपुर की पहचान किसी समय विद्या चरण शुक्ला और 21 वीं सदी में अजीत जोगी मोतीलाल वोरा, रमन सिंग जैसे कद्दावर नेताओं के कारण होती थी और छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद रायपुर का बहुत तेजी से विकास इन्हीं नेताओं के कारण हुआ जिसकी चर्चा पूरे देश में होने लगी लगभग हर उद्योग और बड़े बड़े प्लांट रायपुर में लगने लगे, प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की आधार शिला रखी और भव्य स्टेडियम बन के तैयार हो गया परन्तु जोगी जी की सरकार दुबारा नहीं आई इस बीच में विद्या चरण शुक्ला ने अपने अत्यंत करीबी पप्पू भाटिया को जिम्मेदारी दी कि वो छत्तीसगढ क्रिकेट एसोसिएशन बनाए इस काम हेतु पप्पू भाटिया जी ने अजय तिवारी जो आज ज्वाइंट सेक्रेटरी है , शमीम मिर्जा जी जो अपनी तपस्या और मेहनत से इतना खूबसूरत स्टेडियम और ग्राउंड पिच के क्यूरेटर है कई और साथियों के साथ लगभग हर जिले में एसोसिएशन तैयार किया और बेहद मेहनत करके बीसीसीआई से अफीलेशन लेकर छत्तीसगढ़ क्रिकेट को एक नई दिशा दी दिल्ली से कोलकाता तक दौड़ का वो सफर छत्तीसगढ़ के बच्चों के भविष्य को नया आयाम देने वाला था।
भाटिया जी की मेहनत का ही परिणाम था कि छत्तीसगढ़ की अपनी रणजी टीम भी बन गई और यहां के लोगों को क्रिकेट का इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उसी लेवल का मिलने लगा जो अन्य प्रदेश में पहले से था उन्हीं कारण यहां से आईपीएल जैसे वल्र्ड क्लास टूर्नामेंट में प्लेयर खेलने लगे आईपीएल के मैच रायपुर में करवाकर पप्पू भाटिया ने विश्व क्रिकेट के खिलाड़ी को बहुत खूबसूरत स्टेडियम होने का अहसास दिलाया और बोर्ड ऑफ क्रिकेट कंट्रोल को बार बार इतनी सुविधा और खुबसूरत मैदान में इंटरनेशनल मैच करवाने को मजबूर किया सादगी और व्यक्तित्व के धनी भाटिया जी के पुत्र प्रबतेज भी अपनी पिता की राह में क्रिकेट को समर्पित होकर काम कर रहे हैं वो आज बीसीसीआई के ज्वाइंट सेक्रेटरी जैसे अहम पद में है, पिता पुत्र की जोड़ी एवं भाटिया जी के मित्र और छत्तीसगढ़ क्रिकेट के मार्गदर्शक विजय शाह ने मिलकर रायपुर में दुनिया के तमाम दिग्गज खिलाडिय़ों को यहां लाकर रायपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर में एक नया आयाम दिया, और अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।



