राजनांदगांव। दिगंबर जैन समाज द्वारा पर्यूषण (दसलक्षण) पर्व के समापन अवसर पर रविवार को क्षमावाणी महापर्व अत्यंत श्रद्धा, विनम्रता और आत्मशुद्धि के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर में भगवान श्री नेमिनाथ जी की भव्य एवं मनोहारी शोभायात्रा निकाली गई, जिससे पूरा शहर “जय जिनेंद्र” और “उत्तम क्षमा” के जयघोष से गूंज उठा।
भक्तों ने हाथों से खींचा भगवान का रथ
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान नेमिनाथ जी का रथ रहा। श्रद्धालुओं ने स्वयं अपने हाथों से रथ को खींचकर धर्म प्रभावना की। शोभायात्रा में समाज के सभी वर्ग—पुरुष, जैन आदर्श महिला मंडल, बालिका मंडल और बालक मंडल के सदस्य अपनी पारंपरिक विशेष वेशभूषा में शामिल हुए।
मन, वचन और काया से मांगी क्षमा
दिगंबर जैन पंचायत के सचिव सूर्यकांत जैन ने बताया कि जैन धर्म में क्षमा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। 10 दिनों की आत्म-साधना के बाद श्रावक अपनी भूलों की आत्म-निंदा करते हैं। जाने-अनजाने में मन, वचन और काया से यदि किसी भी जीव को कष्ट पहुंचा हो, तो उसके लिए भगवान, पंच परमेष्ठी, मुनि संघ एवं समस्त साधर्मी बंधुओं से “मिच्छामि दुक्कड़ं” कहकर क्षमा याचना की जाती है।
तपस्वियों का सामूहिक पारणा व बहुमान
दसलक्षण पर्व के दौरान 10 दिनों तक कठिन उपवास रखकर तपस्या करने वाले तपस्वियों का समाज द्वारा सामूहिक पारणा कराया गया। दिगंबर जैन पंचायत की ओर से सभी तपस्वी श्रेष्ठी जनों का विशेष सम्मान किया गया।
समिति ने जताया आभार
दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष अशोक झंझरी, सूर्यकांत जैन, अनिल बड़कुल, सुधेश जैन, पंकज जैन, पूनम और राजीव जैन ने सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों में सहयोग के लिए समाज का आभार व्यक्त किया। अंत में पंचायत कमेटी ने सभी से उत्तम क्षमा मांगकर मैत्री का संदेश दिया।



