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लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए 500 लोगों तक पहुंचा स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश

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रायगढ़, 12 अगस्त 2026 / बच्चों में होने वाले गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान, जांच एवं उपचार तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी संदेशों को समुदाय तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से विकासखंड पुसौर के ग्राम गोर्रा स्थित डीपापारा हाट बाजार में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग रायगढ़ द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक, लोकगीत एवं नृत्य के माध्यम से करीब 500 लोगों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। स्थानीय परिवेश और लोक कला से जुड़े माध्यमों ने जटिल स्वास्थ्य विषयों को भी सहज, रोचक और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज), सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग के शुरुआती संकेतों की जानकारी दी गई। नुक्कड़ नाटक के जरिए बताया गया कि बच्चों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बिना कारण वजन कम होना, कमजोरी एवं अत्यधिक थकान जैसे लक्षण टाइप-1 डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चों की समय पर जांच कराने और नजदीकी स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करने की अपील की गई। इसी तरह सिकल सेल रोग के मामले में समय पर जांच, नियमित उपचार और फॉलो-अप के महत्व को समझाया गया। लोगों को बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों और भेदभाव से दूर रहने तथा प्रभावित बच्चों का उपचार बीच में न छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। जन्मजात हृदय रोग के संबंध में बच्चों में दूध पीने में परेशानी, दूध पीते समय पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, बार-बार बीमार पड़ना अथवा उम्र के अनुसार वजन न बढ़ने जैसे संभावित संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि “समय पर पहचान, समय पर जांच और समय पर उपचार” बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। अभिभावकों से बच्चों में दिखाई देने वाले असामान्य लक्षणों पर तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने की अपील की गई।
लोकगीतों से मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव और टीकाकरण का संदेश
सांस्कृतिक कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। लोकगीतों एवं नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक एवं संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम, सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव तथा नवजात शिशु की उचित देखभाल के संबंध में जागरूक किया गया। साथ ही शिशु के लिए स्तनपान तथा बच्चों के समय पर और पूर्ण टीकाकरण के महत्व की जानकारी भी दी गई। गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों में बीमारी या किसी जोखिम के संकेत दिखाई देने पर उपचार में देरी न करने तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता अथवा नजदीकी स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करने के लिए समुदाय को प्रेरित किया गया। हाट बाजार जैसे सार्वजनिक एवं सामुदायिक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम से बड़ी संख्या में ग्रामीणों तक स्वास्थ्य संदेश पहुंचा।
कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती रंजना पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। आयोजन में जिला नोडल अधिकारी-एनसीडी डॉ. जावेद, जिला जन स्वास्थ्य नर्स श्रीमती सीमा बरेट एवं जिला सिकल सेल नोडल अधिकारी डॉ. सुमित मंडल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का सहयोग रहा। यूनिसेफ के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेन्द्र सिंह एवं उनकी टीम ने तकनीकी सहयोग दिया, जबकि एमसीसीआर ट्रस्ट के डायरेक्टर डॉ. डी. श्याम कुमार एवं उनकी टीम ने आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।