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शिक्षक को नक्सली बताने पर बिफरा राजपूत समाज, कलेक्टर व एसपी को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

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राजनांदगांव। जिला राजपूत समाज एवं राष्ट्रीय करणी सेना के नेतृत्व में आज राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय बहादुर द्वारा कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण में तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि नक्सली पीड़ित परिवार से आने वाले शासकीय कर्मचारी सतीश सिंह को नक्सली कहना न केवल एक व्यक्ति का, बल्कि पूरे समाज के सम्मान का अपमान है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संजय बहादुर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि स्टेशन पारा स्थित शासकीय मिडिल स्कूल में शिक्षक सतीश सिंह द्विवर्षीय डीपीएड विभागीय प्रशिक्षण पूर्ण करने उपरांत जब शाला में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे, तब वहां अनाधिकृत रूप से प्रधान पाठिका के साथ बैठा व्यक्ति सुरेश जैन ने न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली, बल्कि प्रधान पठिका के सामने उन्हें उठाकर पटक देने की खुलेआम धमकी दी। सतीश सिंह द्वारा प्रधान पठिका से स्कूल में सुरेश जैन की उपस्थिति को लेकर प्रश्न पूछने पर कहा कि इस विषय का आदेश मेरे पास वाट्सऐप में है और सुरेश जैन मेरे परिचित ये कभी भी स्कूल में आ जा सकते है। साथ हीं कहा स्कूल में कौन आएगा, नहीं आएगा ये मेरा निर्णय है। इस दौरान बाहरी व्यक्ति सुरेश जैन स्वयं को भास्कर दूत का पत्रकार बताते हुए दबाव व भय बनाने का प्रयास किया गया। साक्ष्य के रूप में घटना का संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग भी है।
संजय बहादुर ने स्पष्ट रूप से कहा कि सुरेश जैन नामक व्यक्ति शाला में किस आधार पर और क्यों प्रधान पाठिका के पास आता था, यह स्वयं एक गंभीर प्रश्न है, उसे किसके संरक्षण में विद्यालय परिसर में बैठने और हस्तक्षेप करने की छूट दी गई, आवश्यकता पड़ने पर नियमतः प्रधान पाठक अपने उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन ना लेकर किसी अन्य बाहरी व्यक्ति को सामने क्यों रखा गया? इन सब तथ्यों की भी निष्पक्ष और गहन जांच की जानी चाहिए तथा दोषी कर्मचारियों व व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
संजय बहादुर ने कहा कि यह मामला यहीं तक सीमित नहीं है। जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ग्रुप में, जिसमें पत्रकार, अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न समाजों के प्रबुद्धजन एवं सभी राजनीतिक दलों के नेता जुड़े हुए हैं, उसी ग्रुप में सुरेश जैन द्वारा सतीश सिंह को नक्सली और आतंक फैलाने वाला लिखकर गंभीर एवं आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। यह कृत्य एक शासकीय कर्मचारी व उसके परिवार की गरिमा के साथ साथ संपूर्ण राजपूत समाज को ठेस पहुंचाने वाला अपमानजनक और अत्यंत आपत्तिजनक है।
उन्होंने कहा कि सतीश सिंह ऐसे परिवार से आते हैं, जिनके बाल्यकाल में ही नक्सलियों द्वारा पुलिस प्रशासन के सहयोग का आरोप लगाकर उनके पिता की पूरे परिवार के सामने नृशंस हत्या कर दी गई थी, उनके पिता एक प्रतिष्ठित, सभ्य व्यक्ति के रूप मे आम जनता के बीच जाने जाते थे। ऐसे परिवार के सदस्य को नक्सली कहना अत्यंत पीड़ादायक, घृणित और अस्वीकार्य है।
संजय बहादुर ने कहा कि राजपूत समाज का इतिहास त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति से भरा हुआ है। इस समाज ने देश की रक्षा के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं। ऐसे समाज के व्यक्ति को नक्सली या आतंक फैलाने वाला कहना राजपूत समाज के सम्मान के खिलाफ है और किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजपूत समाज स्पष्ट करता है कि ऐसी टिप्पणी और घटनाओं को किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि सतीश सिंह शासकीय सेवा में रहते हुए भी अपनी मेहनत और लगन से शूटिंग चैंपियनशिप में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मलिफाई कर प्रदेश और समाज का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्हें विधायक डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से शासन द्वारा प्रोत्साहन राशि व उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा सम्मानित भी किया गया, ऐसे व्यक्ति को इस प्रकार बदनाम करना, मानसिक प्रताड़ना देना घोर निंदनीय, अपमानजनक एवं किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं है। इन घटनाओं और कार्यभार ग्रहण ना हो पाने के कारण सतीश सिंह राष्ट्रीय स्तर की शूटिंग प्रतियोगिता मे भाग लेने भोपाल नहीं जा सके, जिसका नकारात्मक प्रभाव राज्य के खेल प्रतिभा व उनके कैरियर पर भी पड़ा है, इसलिए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही आवश्यक है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर सुरेश जैन के विरुद्ध तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी से यह भी मांग की गई है कि उच्च कार्यालय से आदेश के बावजूद सतीश सिंह को कार्यभार ग्रहण करने से क्यों रोका गया, इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो राजपूत समाज एवं राष्ट्रीय करणी सेना सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
अंत में संजय बहादुर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर समाज के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।