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शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए-श्री रमेन डेका

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 रायपुर.  राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवर्तन जीवन का नियम है और शिक्षा हमारे जीवन में कई तरह के सकारात्मक बदलाव लेकर आती है। अगर हम अपनी शिक्षा के माध्यम से समाज में पीछे छूट रहे लोगों का जीवन सुधार पायें उनकी ज़िंदगी बेहतर बना पायें तो हमारा जीवन सफल होगा और इस अनमोल मनुष्य जीवन का सदुपयोग कर पाएंगे।

दीक्षांत समारोह में 816 स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट विद्यार्थियों को उपाधियाँ और पदक प्रदान किए गए। शेल इंडिया की अध्यक्ष और शेल लुब्रिकेंट्स एशिया पैसिफिक की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंसी मदन त्रिपाठी को विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टर ऑफ फिलोसोफी (ऑनोरिस काउसा) से सम्मानित किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका आज एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा से ही विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया का सकता है। उन्होंने श्री कृष्ण द्वारा भगवत गीता में दिए ज्ञान का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमें अपनी अंतर आत्मा से साक्षात्कार करते रहना चाहिए ताकि हम सही और ग़लत में अंतर समझ सकें।

अंतरात्मा की सुनेंगे वो आपको कभी ग़लत काम करने नहीं देगी और इसी तरह आप ख़ुद को ईश्वर के नज़दीक पायेंगे और आपको आत्म संतुष्टि प्राप्त होगी। शिक्षा से हम ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर सकते हैं। जीवन का एक उद्देश्य होना चाहिए और हमें शिक्षा में भी एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें हमें तकनीक का उपयोग करके जीवनशैली को बेहतर बनाना सिखाती है। लेकिन हमें अपने समाज, राष्ट्र और संस्थान के लिए भी अपना योगदान देना चाहिए।