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उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व मे विभाग के वाहन मे ही जलाऊ लकड़ी पकड़ी गई

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गरियाबंद. उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व मे जंहा 1 फरवरी से संध्या 6 बजे से सुबह 6 बजे तक आम लोगो की आवाजाही मे रोक लगी, परन्तु पहले ही दिन हैरान करने वाला वाक्या सामने आया। जिस उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व क्षेत्र मे पेड का पत्ता तक तोड़ने मे प्रतिबंध हैं उस इलाके से इसी विभाग के वाहन  सी जी जीरो टू अस्सी सत्यासी मारुती सफारी मे विभाग के अफसर एस डी ओ के बेटे के द्वारा जलाऊ लकड़ी बता कर वाहन मे लकड़ी भर कर ले जाते स्थानीय पत्रकारों ने लोगो की सुचना पर मैनपुर आने के रास्ते मे ही पकड़ लिया। जिसके बाद विभाग कर्मचारी द्वारा कार्यवाही की गई। जिसे प्रक्रिया मे चूक का मामला बताया जा रहा हैं। विभाग ने जप्त की गई लकड़ी की क़ीमत पांच सौ रूपये आँकी गई हैं. जिसे मृत जगली जानवर को जलाने लाया जाना बताया जा रहा हैं।

यह वही संवेदनशील इलाका है जहाँ आम आदमी अगर शाम 6 बजे के बाद गलती से मोटरसाइकिल लेकर घुस जाए, तो कानून ऐसा टूट पड़ता है जैसे उसने लकड़ी नहीं, पूरा जंगल ही उठा लिया हो। यंहा कुछ सवाल जो विभाग के लिए लोगो द्वारा उठाया गया जैसे लकड़ी एसडीओ की सरकारी गाड़ी में कैसे लाई जा रही थी। उस मारुती सफारी वाहन को एस डी ओ का पुत्र उनकी गैरहाजरी मे कैसे चला रहा था?  बिना किसी वैध पर्ची या दस्तावेज के रात के प्रतिबंधित समय में लकड़ी क्यू लाई जा रही थी।  यही कार्य कोई आम ग्रामीण करता, तो क्या होता? वाहन ज़ब्त, जुर्माना, एफआईआर, फोटो खिंचवाकर मिडिया और सोशल मीडिया पर वायरल की जाती। पर यहाँ तो लकड़ी भी VIP वाहन भी VIP और शायद कानून भी छुट्टी पर था । यह विभाग वही विभाग है, जहाँ लकड़ी तस्करी को “गंभीर अपराध” कहा जाता है। वही विभाग हैं जहाँ वन्यजीवों की सुरक्षा प्रथम कर्तब्य हैं। सामान्य भाषा में इस संवेदनशील टाइगर रिज़र्व क्षेत्र से लकड़ी ले जाना अपराध है, चाहे लकड़ी छोटी हो या बड़ी । बहरहाल विभाग का मामला हैं अफसर को बचाया तो जायेगा ही।

इस विषय पर विभागिय डी एफ ओ व उपनिदेशक वरुण जैन से बात करने पर उन्होंने बताया की वन्य प्राणियों की मृत्यु उपरांत उसे जलाने के लिए लकड़ी लाई जा रही थी।  प्रक्रिया मे गड़बड़ी हुई हैं कागज बनाये जाने थे। चूक पर जुर्माना और अन्य विधिसम्मत कार्रवाही की जाएगी। अफसर हो या आम जन क़ानून सबके लिए एक हैं।