भारतीय कप्तान शुभमन गिल को अपनी कप्तानी की पहली ही सीरीज में अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा है, जहां इंग्लैंड के खिलाफ अब तक तीनों टेस्ट काफी करीबी रहे हैं और पांच दिनों तक चले। गिल ने हालांकि कप्तान के तौर पर इसे शारीरिक थकान से ज्यादा मानसिक थकान करार दिया। यह सीरीज अब तब बेहद करीबी रही है और लॉर्ड्स में मैदान पर हुए दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच तनाव ने प्रतिद्वंद्विता को और बढ़ा दिया है। भारत पांच मैचों की सीरीज में 1-2 से पीछे है।
गिल ने अपनी कप्तानी पर क्या कहा?
गिल ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो शारीरिक रूप से यह कम थकाऊ रहा है, मानसिक रूप से ज्यादा थकाऊ है। जब आप एक खिलाड़ी के रूप में वहां होते हैं तो आप बस मुकाबले के बारे में ही सोच रहे होते हैं। आप कुछ होने का इंतजार कर रहे होते हैं, गेंद आपके पास आने का इंतजार कर रहे होते हैं। जब आप कप्तान होते हैं तो आपको और अधिक सोचना पड़ता है। आप दूसरे के बारे में भी सोचते हैं। इसलिए आप मानसिक रूप से खेल से अधिक जुड़े होते हैं। मैं कहूंगा कि मानसिक रूप से यह ज्यादा थकान भरा रहा है, शारीरिक रूप से यह वास्तव में कम थकाऊ रहा है।’
लॉर्ड्स टेस्ट में हुए विवाद पर गिल की तीखी प्रतिक्रिया
गिल ने लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों द्वारा अपनाई गई देरी करने की रणनीति की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि क्रीज पर 90 सेकेंड देरी से आना खेल भावना के अनुरूप नहीं था। मैनचेस्टर टेस्ट से पहले कप्तान गिल ने तीसरे टेस्ट में हुए तनाव पर बात की। उन्होंने कहा, ‘हां बहुत से लोग इसके बारे में बात कर रहे हैं इसलिए मैं एक बार और सभी के लिए स्पष्ट कर दूं कि उस दिन इंग्लैंड के बल्लेबाजों के पास सात मिनट का खेल बचा था, वे क्रीज पर 90 सेकेंड देरी से आए, 10 नहीं, 20 नहीं, बल्कि 90 सेकेंड देरी से। हां, अधिकतर टीमें यही (देरी करने की रणनीति) करती हैं। अगर हम इस स्थिति में होते तो हम भी कम ओवर खेलना पसंद करते लेकिन ऐसा करने का एक तरीका होता है और हमें लगाता है कि अगर आपके शरीर पर गेंद लगती है तो फिजियो को मैदान पर आने की इजाजत है और यह उचित भी है।’
’90 सेकेंड देरी से आना खेल भावना के अनुसार नहीं’
बुमराह ने तीसरे दिन आखिरी ओवर फेंका था और दिन का खेल खत्म होने से ठीक पहले खेल में देरी करने के लिए क्रॉली की तरफ व्यंग्यात्मक लहजे में ताली बजाई थी। भारतीय खिलाड़ियों और डकेट के बीच भी बहस हुई थी। गिल ने भी क्राउली को हिम्मत दिखाने को कहा था। गिल ने कहा, ‘लेकिन मुझे नहीं लगता कि क्रीज पर 90 सेकेंड देरी से आना खेल भावना के अनुसार है। उस घटना से ठीक पहले, बहुत सी ऐसी चीजें हुईं जिनके बारे में हमें लगता था कि उन्हें नहीं होना चाहिए था, लेकिन वे हुईं, मैं यह नहीं कहूंगा कि मुझे इस पर बहुत गर्व है। लेकिन इसकी भूमिका थी, यह अचानक नहीं हुआ और हमारा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था।’ भारतीय कप्तान ने आगे कहा, ‘लेकिन बात बस इतनी है कि आप एक मैच खेल रहे हैं, आप जीतने के लिए खेल रहे हैं और इसमें बहुत सारी भावनाएं शामिल होती हैं और जब आप देखते हैं कि कुछ ऐसी चीजें हो रही हैं जो नहीं होनी चाहिए तो कभी-कभी भावनाएं अचानक से आ जाती हैं।’
सीरीज बचाने के लिए हर हाल में चाहिए जीत
इंग्लैंड ने लीड्स में खेले गए सीरीज के पहले मैच में जीत हासिल की थी, जबकि भारत ने दूसरे टेस्ट मैच को जीतकर सीरीज 1-1 से बराबर कर दी थी। लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में भारत ने दबदबा बनाया था, लेकिन पांचवें मैच में आसान सा लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी थी। इस हार के चलते भारत सीरीज में पिछड़ गया। अब उसे सीरीज में बने रहने के लिए चौथा मुकाबला हर हाल में जीतना होगा। भारत के लिए यह मैच काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन खिलाड़ियों की चोट से उसकी मुश्किलें काफी बढ़ गई है।



