प्रशासन निजीकरण की सोचे भी नहीं
कवर्धा। पंडरिया सहित पूरे ज़िले में लगभग 80 प्रतिशत किसान भाई गन्ने की खेती करते है। ज़िले में दो शक्कर कारख़ाना संचालित है, जहां किसान अपना फसल अधिक से अधिक दाम पर बेच कर, लाभांश राशि और सरकार से मिलने वाली बोनस राशि से अन्य फसल की अपेक्षाकृत अधिक कमाई करते हैं। परंतु कुछ महीने से पंडरिया के शक्कर कारख़ाना को नुक़सान में बताकर किसानों को भुगतान में हो रही समस्याओं के चलते कारख़ाना को निजी कंपनी को देने की अफ़वाह चल रही है। प्रशासन निजीकरण की सोचे भी नहीं, जबकि क्षेत्र के किसान किसी भी कीमत पर कारखाना का निजीकरण होने नहीं देंगे।
किसान नेता रवि चंद्रवंशी ने जारी विज्ञप्ति में उक्त बातें कहीं। उन्होने पंडरिया विधायक से भी निजीकरण के मामले पर स्पष्टीकरण देने की माँग करते हुए कहा कि आज की परिस्थिति में कारख़ाना के निजीकरण होने की बात चलने से लगभग 7000 शेयरधारी किसान चिंतित नज़र आ रहे हैं। किसानों को अंदेशा है कि यदि कारख़ाना निजी हाथो में चला गया तो किसान भाइयोे को बहुत नुक़सान होगा। इसलिए हमारे पंडरिया विधायक जो छोटी छोटी बातो पर प्रेस विज्ञप्ति या वीडियो संदेश देती रहती हैं, उनको इस बड़े मामले पर किसानों को आस्वस्त करना चाहिए कि कारख़ाना के निजीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः असत्य है। परंतु ऐसा नहीं होने के कारण किसानों की चिन्ता बनी हुई है।
श्री चन्द्रवंशी ने कहा कि कारख़ाना प्रबंधन एक ओर पिछले छः माह से किसानों को भुगतान नहीं कर पाई है। कही यह निजीकरण की दिशा में प्रबंधन और प्रशासन की मिलीभगत के चलते कोई साजिश की बू भी आ रही है। किसानों को भुगतान न कर परेशान किया जाए, जिससे निजीकरण का रास्ता आसान हो जाए। किसान नेता श्री चन्द्रवंशी ने कहा कि यह फ़ैक्ट्री हमारे क्षेत्र की उन्नति का प्रतीक है। इसे हम किसान किसी भी क़ीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने देंगे। ज़रूरत पड़ने पर किसानों के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी उग्र प्रदर्शन करेगी और क्षेत्रीय किसान किसी भी कीमत पर शक्कर कारखाना का निजीकरण नहीं होने दंेगे।



