राजनांदगांव। कौमी एकता को अपना आदर्श मानने वाले संस्कारधानी नगरी के धर्मप्रेमी जिला कांग्रेस कमेटी व्यापार के अध्यक्ष सैय्यद अफजल ने कहा श्री राम मनुष्यता के सबसे निकट रहने वाले अवतारी हैं। विष्णु के भिन्न अवतारों को भीतर उतार पाना कठिन है, लेकिन राम बन जाने के रास्ते सबसे सुगम हैं। वह चमत्कारों और विशिष्टताओं की उस परिधि से मुक्त हैं जिसमें मनुष्य का प्रवेश असंभव है। राम के जीवन में अतिशयोक्ति न थी, उनके जितने गुण आप गिनेंगे उतने ही आत्मसात भी कर सकते हैं। राम और मनुष्यों के बीच भक्त और भगवान का भेद नहीं है। यह मनुष्य का मनुष्यता से भेद है। आप जितने अधिक मनुष्य हो जाएंगे, राम की भव्यता उतनी ही निकट महसूस होगी।
आज हमने अपनी भारतीयता के महापुरुषों को धर्म और राजनीति की दीवार से बांध दिया है, हमें यह समझने की जरूरत है कि श्रीराम केवल एक धर्म के नहीं, बल्कि इस मिट्टी की धरोवर है और धरोवर को बांटना ना तो मुमकिन है ना और ना अक्लमंदी राम सिर्फ एक नाम या एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक व्यक्तिव है सिर्फ पुजनीय नहीं बल्कि अनुकरणीय है। राम हिंदुस्तान की सांस्कृतिक विरासत हैं, राम आदर्श व्यक्तिव के प्रतीक है, राम का पूरा जीवन आदर्शो संघर्षों से भरा पड़ा है। श्री राम सिर्फ एक आदर्श पुत्र ही नहीं, आदर्श पति और भाई भी थे, जो व्यक्ति संयमित मर्यादित और संस्कारित जीवन जीता है, निःस्वार्थ भाव से उसी में मर्यादा पुरूषोतम श्रीराम के आदर्शो की झलक परिलक्षित हो सकती है। आज राम नवमीं की शुभकामनाओं के साथ समस्त विश्व के लिए कल्याण की कामना हैं।



