कोच्चि. केरल में कासरगोड के पेरिया में पांच साल पहले दो युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुना दी है। उसने 10 आरोपियों को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिनमें पहले आठ आरोपी भी शामिल हैं। वहीं, 20 वें आरोपी पूर्व विधायक केवी कुन्हिरमन को पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
आरोपियों ने की सजा कम की मांग
एर्नाकुलम में सीबीआई विशेष अदालत ने शुक्रवार को दोपहर सवा 12 बजे आसपास पेरिया डबल मर्डर केस में सजा का एलान किया, जिसके लिए कासरगोड के कल्लियोट, पीड़ितों की स्मृति स्थल और अदालत के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। फैसले से पहले आरोपियों ने कहा कि वे आदतन अपराधी नहीं हैं। वह व्यवहार में सुधार लाना चाहते हैं। इसलिए कम से कम सजा दी जाए। वहीं, सीबीआई ने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की सजा की मांग की, यह बताते हुए कि अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यही सही है।
2019 का मामला
केरल के कासरगोड में पेरिया डबल मर्डर केस में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं 24 वर्षीय सरथ लाल और 19 साल के कृपेश की 17 फरवरी 2019 को हत्या की गई थी। इस हत्या को राजनीतिक प्रेरणा से किया गया माना गया। इस मामले ने भारी विवाद पैदा किया था। आरोप है कि सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं का इस हत्या में हाथ था। इस मामले की शुरुआत में बेकल पुलिस और बाद में क्राइम ब्रांच ने जांच की, लेकिन पीड़ितों के माता-पिता की याचिका पर मामला सीबीआई को सौंपा गया। केरल सरकार ने सीबीआई जांच का विरोध किया था, लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील खारिज होने के बाद सीबीआई को जांच सौंप दी गई थी।
10 आरोपियों को किया बरी
पिछले साल 28 दिसंबर को विशेष सीबीआई अदालत ने सरथ लाल और कृपेश की 2019 में हुई हत्याओं में 24 आरोपियों में से 14 को दोषी ठहराया, जबकि 10 अन्य को बरी कर दिया। सीबीआई ने 10 अतिरिक्त आरोपियों की पहचान की थी, जिनका नाम सीबीआई द्वारा जांच में सामने आया था। 10 दिसंबर 2020 को सीबीआई ने इस मामले को अपने हाथ में लिया था और 24 आरोपियों को नामित किया था। सीबीआई ने दिसंबर 2021 में अपनी चार्जशीट दायर की थी। कई आरोपियों को उच्च सुरक्षा वाली जेलों में रखा गया था।
22 महीने पहले चला था मुकदमा
मुकदमा 22 महीने पहले शुरू हुआ था और इसे दो न्यायधीशों के तहत चलाया गया था। विशेष न्यायाधीश शेषाद्रिनाथन ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने 154 गवाहों, 495 दस्तावेजों और 85 प्रमाणों को पेश किया था। बचाव पक्ष की ओर से सीके श्रीधरन और निकोलस जोसफ ने दलील दी। यह फैसला पांच साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया।



